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	<title>प्रैस</title>
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	<description>कवि संगम</description>
	<pubDate>Sat, 09 Jan 2010 11:28:21 +0000</pubDate>
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		<title>दिल्ली में दो दिन चला देश भर के कवियों का महाकुंभ</title>
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		<pubDate>Sat, 09 Jan 2010 11:28:21 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
		
		<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>

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		<description><![CDATA[  
  
जगदीश मित्तल
 (राष्ट्रीय संयोजक) राष्ट्रीय कवि संगम
 
सन 2010 की 2-3 जनवरी। घना कोहरा, धुंध और ठिठुराती सर्दी। दिल्ली के सुप्रसिद्ध छतरपुर मंदिर के बगल में अध्यात्म साधना केंद्र। प्रतिकूल मौसम की सभी चुनौतियों को धता बताते हुए उमड़े चले आ रहे थे -सुदूर दक्षिण मे कर्नाटक से लेकर जम्मू-कश्मीर की वादियों तक, [...]]]></description>
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<p class="MsoNormal" align="right"><strong><span>जगदीश मित्तल</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" align="right"><strong><span> </span></strong><strong><span>(राष्ट्रीय संयोजक) राष्ट्रीय कवि संगम</span></strong><strong><span></span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><strong> </strong></p>
<p class="MsoNormal"><span>सन 2010 की 2-3 जनवरी। घना कोहरा, धुंध और ठिठुराती सर्दी। दिल्ली के सुप्रसिद्ध छतरपुर मंदिर के बगल में अध्यात्म साधना केंद्र। प्रतिकूल मौसम की सभी चुनौतियों को धता बताते हुए उमड़े चले आ रहे थे -सुदूर दक्षिण मे कर्नाटक से लेकर जम्मू-कश्मीर की वादियों तक, असम शिलांग से लेकर महाराष्ट्र तक देश के 17 प्रांतों से, राष्ट्रीयता की ऊर्जा और उष्मा से प्रदीप्त सैकड़ों कविगण। लक्ष्य - राष्ट्रीय कवि-संगम का दूसरा राष्ट्रीय अधिवेशन।</span></p>
<p class="MsoNormal">&nbsp;</p>
<p class="MsoNormal"><span>कवि संगम की शुरुआत हुई थी <span> </span>ढाई वर्ष पहले वाल्मिकी जयन्ती 2007 में। मूल प्रेरणा थी </span>–<span> राष्ट्रीयता का जागरण। स्वप्न द्रष्टा थे श्री इन्द्रेश जी। शिल्पकार थे श्री जगदीश मित्तल जी और संवाहक थे देश के अनेक ख्यातनाम कविगण। एक बार फिर से आ जुटे थे लगभग 400 कवि </span>–<span> अपनी नाभि में राष्ट्रीयता की कस्तूरी संजोए, देश की गहरी चिंताओ और सरोकारों से उद्वेलित, देश की शक्ति और सामर्थ्य से सुपरिचित तथा देश का स्वर्णिम भविष्य गढ़ने को लालायित।</span></p>
<p class="MsoNormal">&nbsp;</p>
<p class="MsoNormal"><strong><span>उदघाटन- सत्र</span></strong><span> को महिमामंडित किया रा॰ स्व॰ संघ॰ के पूर्व सरसंघचालक श्री सुदर्शन जी ने तथा जैन आचार्य महाप्रज्ञ जी के प्रतिनिधि पूज्य शासन गौरव मुनि श्री तारा चन्द जी ने। इस सत्र में <strong>आचार्य महाप्रज्ञ जी की एक काव्यकृति </strong></span><strong>‘</strong><strong><span>अनुभव के बोल</span>’</strong><span> तथा देश भर के कवियों की निर्देशिका का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर श्री सुदर्शन जी ने कहा कि कालचक्र में पड़कर उत्थान </span>–<span> पतन के दौर से गुजरती हुई भारतीय संस्कृति के पुनरुत्थान का युग 2011 से पुन: आरंभ होने वाला है। इसके समर्थ संवाहक बनने का श्रेय राष्ट्रीयता के प्रखर प्रणेताओं को सहज रुप से मिलने वाला है। इस नाते उन्होने राष्ट्रीय कवि संगम के कवियों को आगे बढ़कर शंखनाद करने का आह्वान किया। </span></p>
<p class="MsoNormal">&nbsp;</p>
<p class="MsoNormal"><span>संस्था के <strong>मार्गदर्शक इन्द्रेश जी</strong> ने उदघाटन वक्तव्य में कवियों को संबोधित करते हुए कहा कि साहित्य समाज का दर्पण ही नही अपने युग का दीपक भी होता है। अपने युग के यथार्थ को समझते हुए समाज के मार्गदर्शन की जिम्मेवारी भी उसी पर होती है। राष्ट्ररक्षा<span>  </span>अभियान का कवि एक विवेक शील सिपाही होता है जो अपनी कलम रुपी तलवार से राष्ट्रविरोधी प्रवृतियों का संहार कर सकता है। उनके वक्तव्य का सार यही था कि-</span></p>
<p class="MsoNormal">&nbsp;</p>
<p class="MsoNormal"><strong>“</strong><strong><span>जो वक्त की आंधी से खबरदार नहीं है।<span>   </span>कुछ और ही होगा, कलमकार नहीं है।</span> “</strong></p>
<p class="MsoNormal">&nbsp;</p>
<p class="MsoNormal"><span>राष्ट्रीय कवि संगम के इस प्रयास की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए <strong>हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल</strong> ने कहा की कवि युगदृष्टा होता है, और वह <span> </span>राष्ट्र की समस्यायों का समाधान राष्ट्र के सामने प्रस्तुत करता है। वह अपने समय समाज और देश के लिए मशाल काम करता है। कवि संगम द्वारा देश के कवियों को एक मंचपर लाने का प्रयास सराहनीय है। इस अवसर पर श्री श्याम जाजू, डा॰ नन्दकिशोर गर्ग, श्री रविन्द्र बंसल विधायक, पूर्व महापौर श्री महेश शर्मा सहित अनेक राजनैतिक हस्तियां मौजूद थी।</span></p>
<p class="MsoNormal">&nbsp;</p>
<p class="MsoNormal">&nbsp;</p>
<p class="MsoNormal"><span>प्रख्यात हास्य कवि सुरेन्द्र शर्मा ने </span>‘<span>कविता का भविष्य और भविष्य की कविता</span>’<span> पर चर्चा करते हुए कहा कि वास्तविक कविता वही है जो आम आदमी के जीवन से जुड़ती हो। उनकी बेबाक अभिव्यक्ति से कवियों को अनूठी प्रेरणा मिली। वरिष्ठ ओज कृष्णमित्र ने राष्ट्रीयता को कविता का प्राण तत्व कहा जिस कविता में राष्ट्र व समाज कल्याण की भावना ना हो उसे कविता नही कहा जा सकता। डा॰ कुँवर बेचैन, राजगोपाल सिंह, लक्ष्मीशंकर वाजपेयी, नरेश शांडिल्य ने कहा कविता में शिल्प के बजाय भाव पक्ष का अधिक महत्व होता है शिल्प के प्रति अत्यधिक आग्रह संवेदना की हत्या कर देता है। </span></p>
<p class="MsoNormal">&nbsp;</p>
<p class="MsoNormal"><span>राष्ट्रीय कवि संगम के <strong>राष्ट्रीय संयोजक जगदीश मित्तल</strong> ने स्मरण कराया कि कविता हम नही लिखते हमसे माँ सरस्वती लिखवाती है हम कुछ ऐसा लिख जायें जिससे आने वाली पीढ़ियां प्रेरणा ले। वर्तमान परिदृश्य में कविता की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दुनिया के जिस</span>–<span>जिस देश की कविता समृद्ध है उसने क्रांति करने की पहल की है राष्ट्रीय कवि संगम भी राष्ट्र जागरण क्रांति का अग्रदूत बनेगा।<span>  </span></span></p>
<p class="MsoNormal">&nbsp;</p>
<p class="MsoNormal"><span>प्रताप फौजदार की ओजस्वी कविता </span><strong>“</strong><strong><span>सच है देश भक्ति लौ पर बलिदान पतंगा होता है मृत्यु<span>  </span>भयभीत नही करती जब हाथ तिरंगा होता है </span>”</strong><span> बलवीर सिंह </span>‘<span>करुण</span>’<span> की </span><strong>“</strong><strong><span>भारत माता की जय सुनकर जिसकी छाती फट जाती हो बोलो वह गद्दार नही तो क्या होगा,</span>”</strong><span> नरेश नाज की </span><strong>“</strong><strong><span>मेरा तुमसे एक गीत का वादा है,</span>”</strong><span> रविन्द्र शुक्ल की </span><strong>“</strong><strong><span>अंधियारों को पूज रहे सब, दीपक दूर खड़ा रोता है, जन विवेक फिर भी सोता है </span>”</strong><span> अंग्रेजी नववर्ष पर व्यंग्य करते हुए राजेश चेतन ने कहा </span><strong>“</strong><strong><span>एक जनवरी चकाचौंध में विक्रम संवत भुला दिया है, नही जानते निज का गौरव हमने सब कुछ लुटा दिया है</span>”</strong><strong><span> </span></strong><span>कमलेश मौर्य </span>‘<span>मृदु</span>’<span> की </span><strong>“</strong><strong><span>जिस दिन राष्ट्रीयता की पहचान हेत वन्देमातरम मानदण्ड बन जायेगा, उस दिन भारत अखण्ड बन जायेगा </span>”</strong><span> पंक्तियों और बाँकेलाल जी की </span><strong>“</strong><strong><span>सरस्वती वन्दना </span>”</strong><span> ने प्रेरित किया। </span></p>
<p class="MsoNormal">&nbsp;</p>
<p class="MsoNormal"><span>रात 3:30 बजे तक अधिवेशन परिसर में देश भर से आये <strong>400 कवियों</strong> ने कविता पाठ किया। सभी उदीयमान नवांकुरो से लेकर सिद्ध कवियों ने अंत तक बैठकर एक</span>–<span>दूसरे को सुना, सराहा और महसूस किया कि अलग</span>–<span>अलग मातृभाषा धर्म के होते हुए भी सबकी भावधारा और अधिकांश चिंताएं सांझी हैं, किंतु अभिव्यक्ति के रंग और तेवर विविधता पूर्ण हैं। विभिन्न सत्रों का संचालन गजेन्द्र सोलंकी, अशोक बत्रा, चिराग जैन, प्रवीण शुक्ल, नील, कृष्ण गोपाल </span>‘<span>विद्यार्थी</span>’<span>, अम्बर खरबन्दा, ने सुचारु रुप से किया।<span>    </span><span> </span></span></p>
<p class="MsoNormal">&nbsp;</p>
<p class="MsoNormal"><span>इस अवसर पर देश के तीन कवियों मुम्बई के अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त बाबा सत्यनारायण मौर्य को </span>‘<span>वाल्मिकी सम्मान</span>’<span>, मैनपुरी के दीन मुहम्मद दीन को रसखान सम्मान</span>’<span> तथा मध्य प्रदेश की डा॰ मनोरमा मिश्र को </span>‘<span>मीराबाई सम्मान</span>’<span> से अलंकृत कर सम्मानित किया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal">&nbsp;</p>
<p class="MsoNormal"><span>सूर्या रोशनी के जयप्रकाश अग्रवाल, ए॰ पी॰ आई॰ ग्रुप के सत्य भूषण जैन, माइक्रोन ग्रुप के आर॰ के॰ अग्रवाल, पीयूष ग्रुप के अमित गोयल तथा अग्रवाल पैकर्स मूवर्स के रमेश अग्रवाल जैसे प्रसिद्ध उद्योगपतियों एवं प्रसिद्ध कथाकार अजय भाई की उपस्थिति भी कार्यक्रम की गरिमा बढ़ा रही थी। कार्यक्रम के समापन पर अणुव्रत न्यास के सम्पत मल नाहाटा, कवि संगम के कोषाध्यक्ष स्वदेश जैन, रोशन कंसल, शम्भू शिखर एवं राजेश पथिक ने अतिथियों का धन्यवाद किया। </span></p>
<p class="MsoNormal">&nbsp;</p>
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		<title>राष्ट्रीय कवि संगम-प्रेस विज्ञप्ति</title>
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		<pubDate>Wed, 26 Dec 2007 09:10:08 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
		
		<category><![CDATA[प्रैस]]></category>

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		<description><![CDATA[नई दिल्ली। बीती 15-16 दिसम्बर 2007 को स्वाधीनता संग़्राम की 150 वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में एक अनूठे कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। नई दिल्ली के छतरपुर, महरौली स्थित अध्यात्म साधना केन्द्र में आयोजित इस कवि सम्मेलन में देश के साढ़े तीन सौ जाने-माने कवियों ने हिस्सा लिया। देश के सभी प्रान्तों से आये [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली। बीती 15-16 दिसम्बर 2007 को स्वाधीनता संग़्राम की 150 वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में एक अनूठे कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। नई दिल्ली के छतरपुर, महरौली स्थित अध्यात्म साधना केन्द्र में आयोजित इस कवि सम्मेलन में देश के साढ़े तीन सौ जाने-माने कवियों ने हिस्सा लिया। देश के सभी प्रान्तों से आये इन कवियों ने दो दर्जन से भी ज्यादा भाषाओं और बोलियों में काव्य-पाठ करके लोगों का मन मोह लिया। विशेष रूप से जम्मू कश्मीर, सिक्किम, आसाम, कर्नाटक और आन्ध्र प्रदेश जैसे सीमावर्ती प्रदेशों से आये कवियों को लोगों ने खूब पसन्द किया। इस दो दिवसीय कवि सम्मेलन का आयोजन राष्ट्रीय कवि संगम के बैनर तले ‘राष्ट्र जागरण-धर्म हमारा’ शीर्षक के तहत किया गया।<br />
 कार्यक्रम में स्वाधीनता संग्राम में कवियों और कविताओं के योगदान पर भी सारगर्भित चर्चा की गई। कार्यक्रम का शुभारम्भ अध्यात्म साधना केन्द्र के निदेशक स्वामी धर्मानन्द, आयोजन के मार्गदर्शक श्री इन्द्रेश कुमार, कार्यक्रम के संयोजक श्री जगदीश मित्तल, सहसंयोजक श्री मनमोहन गुप्ता, श्री अशोक गोयल, श्री गजेन्द्र सोलंकी, मोहम्मद अफजाल और राजेश चेतन ने दीप प्रज्जवलित कर किया। इस मौके पर कवि चिराग जैन द्वारा सम्पादित स्मारिका &#8220;जागो फिर एक बार&#8221; का लोकार्पण भी किया गया। कार्यक्रम में आचार्य देवेन्द्र देव ने अपने सुमधुर कण्ठ से माँ सरस्वती की वन्दना प्रस्तुत की तथा कवि श्री नरेश नाज ने अपना गीत &#8216;आजादी के उन्ही पुराने गानों की पहले से भी आज जरुरत ज्यादा हैं&#8217; प्रस्तुत कर उदघाटन समारोह को गरिमा प्रदान की। जबकि प्रसिद्ध फिल्मी गीतकार व संगीतकार रवीन्द्र जैन ने कई फिल्मों के चुने हुए देशभक्ति के गीत गाये। जिनमें शहीद पण्डित राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ का गीत ‘सरफरोशी की तमन्ना’ प्रमुख रहा।<br />
 कवि संगम के मार्गदर्शक इन्द्रेश कुमार ने अपने उदबोधन में कहा कुछ लोग और आन्दोलन वक्त के सांचे में ढल जाते हैं, पर राष्ट्रीय कवि संगम के कवि राष्ट्र जागरण की कविताओं के द्वारा वक्त के सांचे बदलने में सफल होंगे। उन्होंने कवित्व को प्रभु का वरदान और कविता को उस वरदान से निकली हुई गंगा बताया। 16 दिसम्बर बंगलादेश विजय दिवस की याद दिलाते हुए कहा कि कवियों के गीत सीमा पर बैठे जवानों को देश पर मर मिटने की भावना जगाने का काम करती हैं।<br />
 राष्ट्रीय स्तर पर साढ़े तीन सौ कवियों का काव्य-पाठ अपने आप में ऐतिहासिक और राजधानी में अब तक का सबसे बड़ा साहित्यिक आयोजन था। देश-विदेश से आये कवियों ने आजादी के नायकों को कविताओं से याद किया। 1857 के बाद आजादी के परवानों को याद करने की यह अनुपम और अनूठी पहल थी।<br />
 कार्यक्रम के संयोजक जगदीश मित्तल ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में कवियों और कविताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। 1857 से अब तक के डेढ़ सौ वर्षों का इतिहास साक्षी है कि क्रान्तिकारियों के साथ-साथ कवियों ने अपनी लेखनी एवं ओजस्वी स्वर के माध्यम से न केवल देश भर में आजादी की अलख जगाई अपितु जन-जन में क्रान्ति का संचार किया। यह कविताओं की ही शक्ति थी कि बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित “वन्दे मातरम्” गीत आजादी के दीवानों का मंत्र बन गया। कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान की पंक्तियाँ “खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी”, क्रान्तिकारी रामप्रसाद बिस्मिल का गीत “सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है” आदि गीत इस आहुति के बेमिसाल उदाहरण है। वर्तमान परिवेश में भी युवा पीढ़ी को राष्ट्र एवं समाज के प्रति अपने कर्तव्य और दायित्व का बोध कराने के लिये कवियों की कलम, राष्ट्र जागरण एवं निर्माण में आज भी महत्वपूर्ण योगदान कर सकती हैं।<br />
 सांसद और कवि श्री सत्यनारायण जटिया और कविवर श्री छैल बिहारी वाजपेयी &#8216;बाण&#8217; तथा कवि कमलेश मौर्य मृदु ने भी श्रोताओं की तालियाँ बटोरी। राष्ट्रीय कवि संगम की भावनाओं को उल्लेखित करने वाली कमलेश मौर्य ‘मृदु’ की पंक्तियों को लोगों ने खूब सराहा –</p>
<blockquote><p>जीवन मूल्यों को जो अपनी रचना का आधार बनायेगा<br />
भारत के जीवन दर्शन को लेखन में अपनायेगा<br />
मानवतावादी चिन्तन दे राष्ट्रीय भाव पनपायेगा<br />
वह कलाकार कवि लेखक आराधक ही पूजा जायेगा</p></blockquote>
<p>आयोजन में डा॰ राजवीर सिंह क्रान्तिकारी, देवेन्द्र देव, अब्दुल अय्यूब गौरी, गजेन्द्र सोलंकी, शहनाज हिन्दुस्तानी, मदन गोपाल विरधरे ‘मार्तण्ड’, राजेश चेतन, मदन मोहन ‘समर’, डा॰ प्रियंका सोनी, सुधा अरोड़ा, श्रीमती डा॰ अजीत गुप्ता, अर्जुन सिसौदिया, श्रीमती अमिया क्षेत्री, अमर बानिया ‘लोहोरो’, थम्मन नवबाग, श्याम तालिब, दिवाकर हेगड़े, लाड़ सिंह गुर्जर, मनोज कुमार ‘मनोज’, श्रीकांत श्री, कुमार पंकज, बृजेश द्विवेदी, पंकज फनकार, तौफीक सलाम आदि कवियों ने वर्तमान चुनौतियों और ज्वलन्त प्रश्नों का समाधान अपनी कविताओं के माध्यम से प्रस्तुत किया।<br />
 समारोह में विश्वविख्यात कवि और कलाकार बाबा सत्यनारायण मौर्य ने भारत माता की आरती का अपना चिर परिचित कार्यक्रम प्रस्तुत किया। अपने कार्यक्रम के दौरान कवि धर्म के प्रति सचेत करते हुए बाबा ने कहा कि &#8220;फिर मत कहना कवियों ने ना अपना धर्म निभाया हैं, हम बोलेंगे गीत ये हमने बार-बार दोहराया हैं&#8221; अन्तर्राष्ट्रीय कलाकार बाबा ने भारत माँ का रंगीन आशु चित्र बनाकर आरती का गायन किया। इस अवसर पर सैकड़ों लोगों ने 108 दीपकों से माँ भारती की आरती उतारी। कार्यक्रम का सफल बनाने में सहसंयोजक अशोक गोयल तथा राष्ट्रवादी मुस्लिम आन्दोलन के राष्ट्रीय सम्पर्क प्रमुख गिरीश जुयाल, मुहम्मद अफजाल, चिराग जैन, पंकज गोयल, राजेश पथिक, सुनील मल्होत्रा तथा अनिल गर्ग का विशेष योगदान रहा। विशेष रूप से इस अवसर पर पधारे देश के सुप्रसिद्ध कथावाचक श्रद्धेय संजीव कृष्ण ठाकुर ने भी कवि संगम के कार्य को शुभकामनायें दी। वरिष्ठ कवि कृष्ण मित्र, प्रान्त संघचालक रमेश प्रकाश, बांके लाल गौड़ आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किये। जिन संस्थाओं के सहयोग से यह कार्यक्रम आयोजित किया गया, उनमें संस्कार भारती, भारत तिब्बत सहयोग मंच, राष्ट्रवादी मुस्लिम आन्दोलन, अक्षरम्, अखिल भारतीय अणुव्रत न्यास, दिशा फाउण्डेशन, हिन्दी यू॰ एस॰ ए॰, हिमालय परिवार, अखिल भारतीय साहित्य परिषद शामिल हैं।<br />
 राष्ट्रीय कवि संगम राष्ट्र संतों और वरिष्ठ कवियों के मार्गदर्शन में भविष्य में भी कार्य करता रहेगा। इस अवसर पर कार्यकारिणी की घोषणा भी की गई, जिसमे इन्द्रेश कुमार मार्गदर्शक, जगदीश मित्तल संयोजक, पूर्व मन्त्री एवं सांसद सत्यनारायण जटिया, अशोक गोयल, मुहम्मद अफजाल, राजेश चेतन, मनमोहन गुप्ता, गिरीश जुयाल, ॠतु गोयल, प्रवीण आर्य, बांके लाल गौड़ तथा कमलेश मौर्य को सदस्य चुना गया। अध्यात्म साधना केन्द्र के प्रबन्ध न्यासी श्री सम्पत मल नाहाटा तथा निदेशक धर्मानन्द जी ने यह कार्यक्रम वर्ष 2008 में अध्यात्म साधना केन्द्र छतरपुर में ही पुनः करने की आयोजकों से विनती की तथा धन्यवाद प्रस्ताव रखते हुए कहा कि अणुव्रत का यह स्थान सदैव कवि संगम के लिए उपलब्ध रहेगा।</p>
<p>जगदीश मित्तल<br />
संयोजक<br />
9818347350</p>
<p><img src="http://kavisangam.com/kavi/wordpress/press/files/2007/12/dsc_0216.jpg" alt="क्रमश: श्री जगदीश मित्तल श्री इन्द्रेश कुमार , बाबा सत्यनारायण मौर्य" /><br />
क्रमश: श्री जगदीश मित्तल श्री इन्द्रेश कुमार , बाबा सत्यनारायण मौर्य</p>
<p><img src="http://kavisangam.com/kavi/wordpress/press/files/2007/12/dsc_0221.jpg" alt="श्री रमेश अग्रवाल को सम्मानित करते हुये बाबा सत्यनारायण मौर्य" /><br />
श्री रमेश अग्रवाल को सम्मानित करते हुये बाबा सत्यनारायण मौर्य</p>
<p><img src="http://kavisangam.com/kavi/wordpress/press/files/2007/12/dsc_0328.jpg" alt="श्री इन्द्रेश जी का उद्दबोधन" /><br />
श्री इन्द्रेश जी का उद्दबोधन</p>
<p><img src="http://kavisangam.com/kavi/wordpress/press/files/2007/12/dsc_0331.jpg" alt="सुप्रसिद्ध कथावाचक श्री संजीव कृष्ण ठाकुर का सम्मान करते हुये" /><br />
सुप्रसिद्ध कथावाचक श्री संजीव कृष्ण ठाकुर का सम्मान करते हुये</p>
<p><img src="http://kavisangam.com/kavi/wordpress/press/files/2007/12/dsc_0340.jpg" alt="मंच पर विराजमान श्री इन्द्रेश कुमार व अन्य अतिथि गण" /><br />
मंच पर विराजमान श्री इन्द्रेश कुमार व अन्य अतिथि गण</p>
<p><img src="http://kavisangam.com/kavi/wordpress/press/files/2007/12/dsc_0342.jpg" alt="राष्ट्रीय कवि संगम के कार्यकर्ताओं द्वारा श्री इन्द्रेश कुमार का सम्मान" /><br />
राष्ट्रीय कवि संगम के कार्यकर्ताओं द्वारा श्री इन्द्रेश कुमार का सम्मान</p>
<p><img src="http://kavisangam.com/kavi/wordpress/press/files/2007/12/dsc_0359.jpg" alt="आसाम प्रान्त के कवियों का दल" /><br />
आसाम प्रान्त के कवियों का दल</p>
<p><img src="http://kavisangam.com/kavi/wordpress/press/files/2007/12/dsc_0360.jpg" alt="सिक्किम प्रान्त से आये कवियों का दल" /><br />
सिक्किम प्रान्त से आये कवियों का दल</p>
<p><img src="http://kavisangam.com/kavi/wordpress/press/files/2007/12/dsc_0004.jpg" alt="कार्यक्रम का उदघाटन करते हुये श्री रविन्द्र जैन" /><br />
कार्यक्रम का उदघाटन करते हुये श्री रविन्द्र जैन</p>
<p><img src="http://kavisangam.com/kavi/wordpress/press/files/2007/12/dsc_0033.jpg" alt="समारिका का लोकार्पण करते हुये श्री रविन्द्र जैन, श्री इन्द्रेश कुमार व अन्य" /><br />
समारिका का लोकार्पण करते हुये श्री रविन्द्र जैन, श्री इन्द्रेश कुमार व अन्य</p>
<p><img src="http://kavisangam.com/kavi/wordpress/press/files/2007/12/dsc_0045.jpg" alt="मंच पर विराजमान श्री रविन्द्र जैन व अन्य" /><br />
मंच पर विराजमान श्री रविन्द्र जैन व अन्य</p>
<p><img src="http://kavisangam.com/kavi/wordpress/press/files/2007/12/dsc_0072.jpg" alt="कवि शहनाज हिन्दुस्तानी कविता पाठ करते हुये" /><br />
कवि शहनाज हिन्दुस्तानी कविता पाठ करते हुये</p>
<p><img src="http://kavisangam.com/kavi/wordpress/press/files/2007/12/dsc_0080.jpg" alt="सांसद श्री सत्यनारायण जटिया का उदबोधन" /><br />
सांसद श्री सत्यनारायण जटिया का उदबोधन</p>
<p><img src="http://kavisangam.com/kavi/wordpress/press/files/2007/12/dsc_0099.jpg" alt="कवि श्री छैल बिहारी बाजपेयी का सम्मान करते हुये श्री इन्द्रेश कुमार" /><br />
कवि श्री छैल बिहारी बाजपेयी का सम्मान करते हुये श्री इन्द्रेश कुमार</p>
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